दीपदान का महत्त्व
कार्तिक मास में दीपदान का महत्त्व
*प्रकाश उत्सव, देव दिवाली*
तमसो मां ज्योतिर्मय (अर्थात)
हे! ईश्वर हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो।
वस्तु: दीपावली पर्व दीपदान एवम् दीप प्रज्ज्वलित करने का मुख्य प्रयोजन भावना है। दीप जलाकर उसे उचित स्थान पर रखना दीपदान कहलाता है।
मान्यता है कि इस माह में आकाश मण्डल का सबसे बड़ा ग्रह सूर्य तुला राशि में गमन करता है; इस वजह से अंधकार पांव पसारने लगता है, इसलिए कार्तिक मास में दीपक जलाकर, ध्यान, दान, स्नान, पुण्य का विशेष महत्व है।
मंदिरों में, नदी, घाट में प्रवाहित करते हैं दीप जलाकर। शुभ मानते हैं। नवग्रहों के दोष दूर होते हैं।
धन तेरस से भाई दूज तक भी दीप जलाकर उत्सव मनाया जाता है।
बहुत से श्रद्धालु (मंदाकिनी नदी में दीपदान कर समृद्धि का वरदान मांगते हैं।
वेद शास्त्रों में लिखा, ये भी मानना है कि (वनवास काल) में साढ़े ग्यारह साल चिरकुट में गुजारने वाले प्रभु श्री राम अब भी कण कण में हैं।
देव दिवाली के दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद दीपदान करना बहुत शुभ मानते हैं।
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कार्तिक पूर्णिमा को गुरू नानक जयंती पर्व प्रकाश उत्सव के रुप में मनाते हैं।
गुरू को समर्पित भी कार्तिक पूर्णिमा है।
विष्णु की लक्ष्मी को प्रसन्न कर शुभ वरदानों का पर्व कार्तिक मास है
देवो को दिवाली मनाई जाती है। धरती से अम्बर तक झिलमिल रोशनी है।
सभी देव लोक और संतों को आज का दिन समर्पित है।
आस्था, प्रेम और भक्ति की कार्तिक मास है।
हम भी अपने अपने हृदय के अंधकार को दूर कर, आओ प्रेम से से प्रकाश उत्सव मनाएं। अहंकार, ग्लानि को दूर कर भक्ती मय हो जाएं।
गीता ठाकुर दिल्ली से
स्वैच्छिक रचना प्रतियोगिता हेतु
Shashank मणि Yadava 'सनम'
06-Dec-2023 06:55 AM
बहुत ही सुंदर सृजन
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Gunjan Kamal
06-Dec-2023 01:41 AM
👏👌
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